भारतीय चित्रकला

भारतीय चित्रकला का इतिहास
बहुत ही विस्तृत रहा है, भारतीय चित्रकला आदिकाल से चली जा रही है भारतीय चित्रकला विशेष रूप से आदिमानव द्वारा विकसित हुई जिसमें आदिमानव अपने मनोभावों को लाइनों के द्वारा गुफाओं की दीवार और छत ऊपर उकेरा करता था,आदिमानव शिकार पर निर्भर था और शिकार करके अपना जीवन यापन किया करता था, शिकार करने के बाद उसके चरणों में रंग मिलाकर यह रंग विशेष रूप से खड़िया या गेरुआ रंग हुआ करता था, रंगो को चर्बी में मिलाकर आदिमानव इस मिश्रण से दीवारों या छातो पर लाइने ओकेरा करता था इन लाइनों में वह अपने रोजमर्रा के कामों को दर्शाता था और इस प्रकार अपने किए हुए काम को स्मरण रखता था, आदि मानव ने जो चित्र बनाएं क्षेपंकान पद्धति में थे, एक तरह का छापा चित्रण भी कहा जा सकता है आदिमानव अपने चित्रों में ज्यादातर शिकार के दृश्य रोजमर्रा की जिंदगी के चित्र बनाया करता था जैसे-जैसे मनुष्य का विकास हुआ वैसे वैसे मनुष्य के विकास के साथ चित्रकला का विकास हुआ और चित्रकला मनुष्य के मनोभावों को प्रदर्शित करने का एकसरल आकर्षक साधन बन गया, चित्रकला में मनुष्य अपने मन की अभिव्यक्ति करता है वह जैसा सोच ता है जैसे कल्पना करता है वैसे ही वह धरातल पर गिरता है जैसा मनुष्य के मन में विचार होंगे वैसे ही मनुष्य धरातल पर चित्रण करेगा आदिम कला के बाद जैसे-जैसे मनुष्य का विकास हुआ और चित्रकला में विकास हुआ है ज्यामिति का कारों से हटकर माशल आकृतियों का गठन करने लगा जिसका हमें अजंता की गुफाओं से अवशेष मिलते हैं अजंता की गुफाएं भारतीय चित्रकला एवं मूर्तिकला काबे जोड़ा नमूना कहते हैं अजंता की गुफाओं को बनाने में बौद्ध भिक्षुओ का हाथ है, बौद्ध भिक्षुओं ने इन गुफाओं का निर्माण किया यह गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में अजिंठा नामक ग्राम में व्यवस्थित है यह गुफाएं अर्धचंद्राकार मैं बनाई गई है यह गुफाएं बड़े बड़े पहाड़ को पत्थरों को काटकर बनाई गई है यह गुफाएं 29 थे लेकिन बाद में 1 गुफा की फिर खोज हुई और उस गुफा का नाम 15 ए रखा गया, अजंता की गुफाओं में बुद्ध के पूर्व जन्मों के कहानियों के आधार पर चित्र बनाए गए है इन हवाओं में ज्यादातर गेरुवे रंग से चित्र बनाए गए हैं इन गुफाओं को बौद्ध गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है और इनमें बने चित्रों को भूत कला के नाम से जानते हैं अजंता अपनी सुंदर कलाकृति हो एवं अपनी रेखाओं की द्वारा पूरे विश्व भर में विख्यात है अजंता चित्रकला हमेशा अमर रहेगी अपने सुंदर चित्रों के कारण अजंता के अंदर जो चित्र बने हैं वह बुद्ध के पूर्व जन्मों जैसे
 नंबर 1 हस्ती जातक
नंबर 2 श्याम जातक
नंबर 3 कपी जातक
नंबर4 पदंपानिनी
नंबर 5 बजरपानी
नंबर 6 छदनत जातक
नंबर 7 मर्नाशन राजकुमारी
नंबर 8 बुद्ध भिक्षु के रूप में 
नंबर 9 राहुल समर्पण आदि




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